स्वतन्त्रता दिवस - डाॅ० सुमन विष्ट

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला *हिम मन मन्थन* में *"स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर"* प्रस्तुत है, आज *जनपद अल्मोड़ा* से शिक्षिका बहिन *डाॅ० सुमन विष्ट* जी की कविता  :-


*🇮🇳स्वतन्त्रता दिवस🇮🇳*


देखो फिर से स्वतन्त्रता दिवस आया है,

सबके मन में ढेरों खुशियांँ लाया है।

तिरंगे की देखो आज शान निराली है,

हर विद्यालय हर दफ्तर में इसकी आन निराली है।।



आज ही के दिन सन् 1947 में,

हमने स्वतंत्रता पाई थी,

अंग्रेजों की गुलामी से,

आज के ही दिन मुक्ति पाई थी।।


ना जाने कितने ही भारतीय, 

वीरों ने दी अपनी कुर्बानी थी।

आँच ना आए तिरंगे पर, 

इसलिए सीने पर गोली खाई थीं।।


जिन वीरों के त्याग, समर्पण से,

आज का दिन हम पाये।

आओ नमन करें उन्हें हम, 

उनको शीश झुकाएँ।।


होगी सच्ची श्रद्धाञ्जलि यही, 

उनके आदर्शों का पालन करें।

उनके बताए मार्ग पर चलकर,

मानवता की पहचान बनें।।


🙏 रचना:-

डाॅ० सुमन बिष्ट (प्र० अ०) 

रा० प्रा० वि० कालाडुंगरा, लमगड़ा, अल्मोड़ा




*🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड*

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