मन मोहन वृन्दावन वासी - श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता -
मन मोहन वृन्दावन वासी
मन मोहन वृन्दावन वासी,
भारत में फिर से आ जाओ।
साँवरी सूरत मोहनी मूरत,
लेकर दर्शन दे जाओ।।
बाल लीला, वो रास लीला,
हमको तुम दिखा जाओ।
यहाँ पाप का ताप भरा है,
उसको तो दूर करा जाओ।।
कान में कुण्डल, गले में माला,
मोर मुकुट में आ जाओ।
मनमोहन घट-घट के वासी,
भारत में फिर से आ जाओ।।
कमर करधनी, पाँव में घुँघुरू,
मोर मुकुट में आ जाओ।
हाथ में बंसी, कान में कुण्डल,
पहन बैजन्ती आ जाओ।।
रचना-
हेमलता बहुगुणा (पूर्व प्र०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० सुरसिंहधार
चम्बा, टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर मनमोहक कविता एवं देश प्रेम की सुंदर झलक
जवाब देंहटाएंCongratulations