पन्द्रह अगस्त की बेला-श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में "स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर" प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता :-
पन्द्रह अगस्त की बेला
पन्द्रह अगस्त की बेला पर,
झण्डा ऊँचा फहरायेंगे।
नत् मस्तक हो जायेंगें,
सब सर अपना झुकायेंगे।।
मधुर गीत वन्दे मातरम्,
वन्दे मातरम् गायेंगे।
राष्ट्र गान की धुन बजाकर,
राष्ट्र गान को गायेंगे।।
गाँधी जी का रघुपति राघव,
सुख सन्मति घर लायेंगे।
आजादी के उन वीरों को,
दिल से याद कर आयेंगे।।
आजादी दी, बलिदान हुए,
स्वतन्त्रता का बिगुल बजाया था।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई,
ऐसा कोई भाव न आया था।
आजादी का जूनून था सबमें,
मिलकर देश आजाद कराया था।।
हर साल फहरे झण्डा हमारा,
पन्द्रह अगस्त सबकी शान हैं।
स्वतन्त्रता का दिवस है,
यह सबका मान, सम्मान है।।
श्रीमती हेमलता बहुगुणा
( पूर्व प्र० अ०)
रा० उ० प्रा० वि० सुरसिहधार
टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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