म्यारु निरालु देश - श्रीमती सरिता मैन्दोला
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में "स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर" " प्रस्तुत है, आज जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरिता मैन्दोला जी की गढ़वाली कविता :-
' म्यारु निरालु देश"
म्यारा देश की बात निराली,
सादी वेश-भूषा मिठी भाषा बोली।
हिमालय दींदा मुण्ड मा बिराज,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक राज।।
सागर माँ का खुट्यूं तैं चुमदा,
तीज त्यौहारूंमा हम सब झुमदा।
बंगाल-पंजाब मजबूत हाथ,
गंगा-जमुना की क्या बुन्न बात।।
होळी-दिवळी अर ईद मनाँदा,
गुरुग्रन्थसाब की सांचिवाणि गाँदा।
चार-धाम छन यख का खास,
गुजरातौ कु गर्बा, वृन्दावन कु रास।।
अतिथि हमारा द्यवता समान,
मिलि-जुलि रैंदा मनखी नमान।
जाति-पात ना क्वी भेद-भाव,
सब्बी धर्मों का छन यख ठाव।।
🙏 रचना :-
सरिता मैन्दोला
रा० उ० प्रा० वि० गूमखाल
वि०ख० - द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

कविता म देश प्रेम कि भावना
जवाब देंहटाएंअपणी बोली म लेखि कि अपणु पहाड़ कु मान बढा
जुगराज रैया बहिन जी
बहुत सुन्दर
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