मेरे अँगना आना - श्रीमती पूनम भट्ट जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पूनम भट्ट जी की कविता -
मेरे अँगना आना
कृष्णा ओ कृष्णा,
मेरे अँगना भी आना,
आए तुम नन्द बाबा के घर,
मेरे घर भी आ जाना।।
कृष्णा ओ कृष्णा,
मेरे अँगना भी आना।
तुमने बनाया गोकुल को धाम,
बनाना मेरे मन को भी धाम।।
कृष्णा ओ कृष्णा,
मेरे अँगना भी आना।
संग राधा रानी को लाना,
उन संग रास रचाना।।
कृष्णा ओ कृष्णा,
मेरे अँगना भी आना।
ओ माखनचोर दिल में बस जाना,
अपनी नटखट लीलाएंँ दर्शाना।।
कृष्णा ओ कृष्णा,
मेरे अँगना भी आना।
जैसे दिया अर्जुन को ज्ञान,
मुझे भी बतला जाना।।
कृष्णा ओ कृष्णा,
मेरे अँगना भी आना,
भक्तों के हृदय में बसने वाले,
मेरे हृदय में बस जाना।।
🙏 रचना -
पूनम भट्ट (स० अ०)
रा० प्रा० वि० वीड,
वि० ख० - चम्बा, टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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