नगाधिराज हिमालय:-श्रीमती माधुरी नैथानी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती  माधुरी नैथानी जी का लेख-



✍️"नगाधिराजः हिमालय" 


अस्त्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा,

हिमालयो नाम नगाधिराज:।

पूर्वापरो तोयनिधिं वगाह्य,

स्थित पृथिव्या इव मानदण्ड:।।-कुमार सम्भव 

(उत्तर दिशा में हिमालय नाम का पर्वत राज है। जो देवतात्मा है। यह पूर्व और पश्चिम सागरों का अवगाहन करके पृथ्वी के मानदण्ड के समान स्थित है।)



गिरिराज हिमालय अगर भूगोल होता तो उसे स्मरण दिलाने वाला नक्शा हटा देने से उसे भुलाया जा सकता था।हिमालय इतिहास भी नहीं है जिसे प्रगति शील बना कर बुलाया जा सके।  हिमालय भूतकाल और भविष्यत् काल नहीं केवल वर्तमान काल है।

डॉ विद्या निवास मिश्र ने "अस्ति की पुकार हिमालय "निबन्ध में "अस्ति"( है)को शानदार शब्दों में परिभाषित किया है विद्योत्तमा के "अस्ति" शब्द ने कालिदास‌ को संस्कृत साहित्य का महान कवि होने का गौरव प्रदान किया, और हिमालय ने अपने आशीर्वाद से युग- युगान्तर के लिए अमरत्व प्रदान किया।

हिमालय धैर्य, साहस, विनम्रता और अडिगता का  स्तम्भ है। इस संसार की असंख्य आँखें हिमालय को अपने- अपने दृष्टिकोण से निहारती हैं, और व्याख्या करती हैं।  


"नागार्जुन ने हिमालय की बेटियाँ में लिखा है।"


तुम बेटी यह बाप हिमालय,

चिन्तित पर चुपचाप हिमालय।

प्रकृति नटी के चित्रित पट पर,

अनुपम अद्भुत छाप हिमालय।।


कालीदास से लेकर नागार्जुन, विद्या निवास मिश्र, राहुल सांकृत्यायन और  भी अनेक महान  विभूतियों को हिमालय ने चिरंजीवी होने का आशीष दिया। और अनेक कवियों के काव्य भाव को विभूषित कर उनकी लेखनी को धन्य किया।


"नेहरू जी ने हिमालय के बारे में कहा है"-

किसी बेहद सुन्दर स्त्री की तरह हिमालय भी सुन्दर है। वासना और कामना से परे इसकी नदियाँ, घाटियाँ, झीलें और पेड़ों का सौन्दर्य स्त्री सुलभ है, तो दूसरा पहलू पुरुषोचित है। मजबूत निर्मम और जबरदस्त। कभी कराहते हैं ‌दुख से तो कभी मुस्कराते हैं। जैसे -जैसे मैं इन दृश्यों को निहारता हूंँ, मुझे लगता है यह एक सपना है।


गोपाल सिंह नेपाली की एक प्रिय कविता...

 "गिरिराज हिमालय से भारत का 

ऐसा ही कुछ नाता है।"


प्रसाद साहित्य पर हिमालय की असीम कृपा रही है "हिमगिरि के उत्तुंग शिखर" से लेकर "हिमाद्रि तुंग श्रृंग तक"  प्रसाद जी ने हिमालय को काव्यात्मक अभिव्यक्ति में समाहित किया है। हिमालय पर लेखन, हिमालय अध्ययन, और हिमालय दर्शन

क्षितिज का वह हिस्सा है जहाँ तक पहुँचने की सबकी आस अधूरी है।

हम धन्य हैं कि हम हिमालय के चरणों में रहते हैं। पहर में  हिमालय के यही गौरव हमारा है..........




🙏लेखिका:-

माधुरी नैथानी (स०अ०) 

रा० उ० प्रा० वि० भटोली

ब्लॉक- खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर हिमालय का सजीव वर्णन।

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  2. बहुत सुन्दर हिमालय के स्वरूप का सुन्दर, सहज और मार्मिक वर्णन किया गया है। सच में हम तो भाग्यशाली हैं जो इस नागाधिराज के चरणों में बसे है। लोग तो इसके दर्शन हेतु तरसते हैं। इसके स्वरूप का जितना वर्णन किया जाये तो कम ही। ये तो हमारे लिए एक वरदान है। जिसका आशीष हम हर क्षण हर पल ग्रहण कर रसास्वादन प्राप्त करते रहते हैं।
    हे पर्वत राज तुझे मेरा कोटिशः नमन, वन्दन
    समर्पण 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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  3. वाह! आदरणीय माधुरी नैथानी जी🌹🙏🏼🌹
    पर्वत राज हिमालय की इतनी सुन्दर व्याख्या आपके द्वारा🤗आपके आंतरिक सौंदर्य की झलक स्वतः ही प्रकट कर रही है।🤗सच! भाग्यशाली हैं वे लोग जिन्हें हर नूतन बेला पर नगाधिराज के दिव्य दर्शन का लाभ मिलता है।🙏🏼🌹🙏🏼

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