मैं और मेरा समाज - श्रीमती सरोज डिमरी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी की कविता -


✍️मैं और मेरा समाज 


 समाज के साथ अपने,

 सुख-दुख बाँटना है।

 पर शायद मैं और मेरी कल्पना,

समाज का ही तो एक अंग हैं।।



हर कदम पर अमिट छाप दे जाना,

धरती माँ के इस कर्ज को जरुर चुका जाना।

पर्यावरण संवर्द्धन कर समाज की सेवा करना,

यह आदर्श मिसाल कायम करना है।।


मानवता का कोना-कोना,

सदा पुष्पित-पल्लवित होता है।

निर्जन स्थल भी मानवता के आगे,

नतमस्तक होता है।।


शर-सन्धान अगर कर लेता है,

निशाना नहीं चूकने पाता।

जीवन जी सन्तुष्ट हो जाता,

मानव कृत-कृत्य हो जाता।।


🙏 रचना-

सरोज डिमरी (स०अ०)

रा० आ० उ० प्रा० वि०- गौचर

वकर्णप्रयाग, चमोली



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी