स्कूल में प्रवेश - श्रीमती रेखा पुरोहित जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती जी रेखा पुरोहित जी की कविता -
👭✍️स्कूल में प्रवेश
प्रथम बार जब शाला आते,
आँसू आँखों में भर लाते।
पल्लू मांँ का पकड़ करके,
उसके पीछे वो छिप जाते।।
थोड़ा-थोड़ा वह शरमाते,
कुछ कहने में वो घबराते।
खुशी और डर दोनों के ही,
भाव उनके चेहरे पर आते।।
मुझे नहीं है यहांँ रहना,
कोई नहीं है यहांँ अपना।
मांँ मुझे मत छोड़ के जाओ,
संग मेरे कक्षा में आओ।।
भाव उसका ऐसा दिखता,
शाला में वो रहना चाहता।
पर घर की याद जैसे आती,
अश्रुधार आंँखों से बहती।
नजरें उसकी ढूंँढने लगती,
किसी परिचित अपने को।
पर अपरिचित जब सब लगता,
विचलित उसके मन को करता।।
धीरे-धीरे जब मन उसका,
पाठशाला में रमने लगता।
शिक्षक,साथी और स्कूल को
अपना फिर वो समझने लगता।।
🙏 रचना :-
रेखा पुरोहित (स०अ०)
रा० प्रा० वि० सौंराखाल
विकासखण्ड- जखोली
जनपद- रुद्रप्रयाग
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

बहुत-बहुत बधाई आप की कविता के लिए,आप इसी प्रकार अपनी लेखनी से सभी को आकर्षित करती रहें, धन्यवाद,
जवाब देंहटाएंThank you very much ☺️
हटाएंMam bahut acche mein
हटाएंNice poem mam
जवाब देंहटाएं