श्रीकृष्ण - श्रीमती रेखा पुरोहित जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा पुरोहित जी की कविता-
श्रीकृष्ण
यशोदा की आँख का तारा,
नन्द का लाला वो नन्दलाला।
गोपियों का जो कान्हा प्यारा,
दाऊ का भी है बहुत दुलारा।
बाल गोपाल वो सबसे न्यारा।।
मोरपंख जो सिर पे लगाता,
माखन जिसको बहुत ही भाता।
मधुवन में गायों को चराता,
अधरों पर मुरली जो सजाता।
मुरलीधर कान्हा कहलाता।।
पूतना ने जब विष पिलाया,
राक्षस योनि से मुक्त कराया,
कालिया नाग को नाच नचाया,
गोपियों के संग रास रचाया।
वो मोहन लीलाधर कहलाया।।
कंस और शिशुपाल को मारा,
उग्रसेन को राज दिलाया।
माता पिता को भी मुक्त कराया,
द्वारिका नगरी को बसाया।
कान्हा द्वारकाधीश कहलाया।।
दुर्योधन को बहुत मनाया,
टले युद्ध यह मार्ग बताया।
सदा धर्म का साथ निभाया,
सारथी पार्थ का खुद को बनाया।
फिर पार्थ सारथी वो कहलाया।।
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में,
गीता का उपदेश सुनाया।
मार्ग कर्म का जग को दिखाया,
सत्य की जय हो यह समझाया।
फिर योगेश्वर कृष्ण कहलाया।।
🙏
रचना
रचना:–रेखा पुरोहित (स०अ०)
रा० प्रा० वि० सौंराखाल
विकासखण्ड - जखोली
जनपद- रुद्रप्रयाग
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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