एक शिक्षक - श्रीमती पूनम भट्ट

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में शिक्षक दिवस के पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पूनम भट्ट जी की कविता -



🙏 🕉️✍️एक शिक्षक



गर्मी की धूप में निश्छल, 

हवा के झोंके जैसा। 

हरदम हरपल नित नए, 

स्वप्न को आकार देता।

एक शिक्षक ही कर पाता है।। 


नन्हे तुतलाते शब्दों को, 

एक नया आयाम देता। 


कच्ची मिट्टी पाकर, 

गढ़ने में जुट जाता। 

एक शिक्षक ही कर पाता है।। 



सुप्त ज्ञान को करके जागृत, 

नई बुलन्दियों तक पहुंँचाता। 

भूले भटके कदमों को, 


सही राह है दिखाता।

एक शिक्षक ही कर पाता है।।



ज्ञान का अंकुर प्रस्फुटित करता, 

स्वयं से पहचान करवाता। 

नवीन शिक्षण विधियाँ अपनाता, 

सदा नवाचारी प्रयास करता। 

एक शिक्षक ही कर पाता है।।



सबको आगे बढ़ने का संकल्प,

प्रयासरत रहने को तत्पर। 

कामयाबी पर गर्वित होता, 

नाकामयाबी में भी सीख बतलाता। 

एक शिक्षक ही यह कर पाता है।। 


🙏रचना  

 पूनम भट्ट (स०अ०) 

रा० प्रा० वि० वीड

 चम्बा, टिहरी गढ़वाल




🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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