सत्यमेव जयते - सुश्री विजयलक्ष्मी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री विजयादशमी पावन पर्व प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन सुश्री विजयलक्ष्मी जी का 

लेख - 


🙏✍️सत्यमेव जयते 


मधुरा-मंगला ,वन्दनीय भारत भूमि सृष्टि के आदिकाल से अनेक देव -अवतारों, वीर-वीरांगनाओं, भक्तों, सन्तो, ज्ञानीजन, विद्वानों, विदुषियों, ऋषि, महर्षि ,मनीषियों की प्रसूता होने के साथ-साथ, अनेक पर्व, उत्सव और त्योहारों की पावन स्थली है। जिनमें  विजयदशमी या दशहरा को भी महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।

दशहरा का अर्थ:-दशहरा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। 'दश+हरा'=दशहरा जिसका अर्थ है दस इन्द्रियों-आंँख,कान, नाक, जीभ, त्वचा, हाथ, पैर, दो गुप्तांग और मन की बुराइयों काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, अहंकार आदि से ऊपर उठकर चैतन्य आत्मरूप में अवस्थित होना ही विजयदशमी या दशहरा है।



आध्यात्मिक भाषा में "रावण रूपी अहंकार का नाश करके सीता रूपी भक्ति प्राप्त करना है। जो सभी विकारों को दूर करके प्राप्त होती है।


 इस दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध करके समाज में शान्ति व सत्य की स्थापना की थी।


  धर्म की अधर्म पर विजय, दुराचार पर सदाचार की विजय, असत्य पर सत्य की विजय दशहरा मनाने का उद्देश्य है।



"जब जब होई धरम की हानि,

बाड़हिं असुर अधम- अभिमानी। 

तब-तब प्रभु धरहिं विविध सरीरा।

हरहिं कृपा निधि सज्जन पीरा।"


अर्थात जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है। और असुर-अधम-अभिमानी पुरुष अधिक हो जाते हैं। तब भगवान अनेक रूप धारण करके सज्जन लोगों की रक्षा करते हैं।


दूसरे रूप में अाश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि नवमी तिथि तक नवरात्र के दौरान मांँ भगवती अपने नौ रूप में

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा ,स्कन्दमाता ,कात्यायनी,  कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री आदि। नव रूपों में प्रकट होकर असुरों का विनाश करती हैं और दसवें दिन महा असुर महिषासुर का वध करके सृष्टि में शान्ति और धर्म की स्थापना की थी। इसलिए इस दिन को दशहरे के रूप में मनाते हैं।

दशहरा कैसे मनाया जाता है: दशहरे की शुरुआत अाश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से ही हो जाती है। प्रतिपदा से गांँव और शहरों में रामलीला का भव्य मंचन किया जाता है और दशमी तिथि के दिन श्री राम रावण का वध करते हैं भारी मेले लगते हैं ।और मेले के स्थल पर मेघनाद, कुम्भकरण और रावण के विशाल पुतले बनाकर जलाए जाते हैं और भगवान श्री राम की जय के नारे लगाए जाते हैं।

 दूसरी ओर गुजरात बिहार और पश्चिम बंगाल में नवरात्रि के दौरान मांँ दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना की जाती है और नौ दिन तक उनकी पूजा की जाती है और दसवें दिन प्रतिमा का विसर्जन नदियों के पावन जल में किया जाता है।


उपसंहार:- दशहरे के दिन श्रमिक लोग अपने अस्त्र -शस्त्रों की पूजा करते हैं और लड्डू- मिठाई आदि बांँटकर खुशी का प्रदर्शन करते हैं। सैनिक लोग भी अपने शस्त्रों की सफाई करते हैं।

इस दिन दुर्गा माता के अस्त्र -शस्त्रों की पूजा भी की जाती है।

शिक्षा:- बुराई दिखने में भले ही शक्तिशाली लगे लेकिन उसका अन्त अवश्य होता है।


'सत्यमेव जयते'। जीत सत्य की ही होती है।

अतः हम सबको सदाचार अपनाना चाहिए।


लेख 


सुश्री विजयलक्ष्मी (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० चन्द्रनगर

विकास खण्ड-रामनगर

जनपद-नैनीताल



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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