चलाचल- श्रीमती सुषमा नेगी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुषमा नेगी जी की कविता- 


चलाचल


तू कब तलक धरता रहेगा,

हाथ अपने हाथ पर।

तू मनुज है इस धरा पर, 

मनुजता  की बात कर।।



तू तो लौ जलाने चल पड़ा था, 

एक अंँधेरी रात पर।

भटकता क्यों राह अपनी,

राह अपनी याद कर।।


जो करेगा इस धरा में,

सब धरा रह जाएगा।

इस तरह प्रहार मत कर,

तू किसी की घात पर।।


नासमझ क्यों बन रहा,

ना वक्त तू बर्बाद कर।

एक तरन्नुम बन के बहना,

हर दिल को तू नौशाद कर।।


कब तलक छुपता रहेगा,

बादलों को पार कर। 

अब मिला ले ताल अपनी,

हर नए हालात पर।।


🙏 रचना-

सुषमा नेगी (स०अ०) 

रा० प्रा० वि० आर्यनगर काठबंगला

नगर क्षेत्र देहरादून



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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