महर्षि वाल्मीकि - श्रीमती बसन्ती शाह

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में महर्षि वाल्मीकि अवतरण दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग  से शिक्षिका बहिन श्रीमती बसन्ती शाह जी की कविता - 


महर्षि वाल्मीकि 


आश्विन मास की पूर्णमासी, 

का वह सुनहरा समय था।

रामायण के रचयिता संस्कृत के, 

प्रथम कवि का जन्म दिवस था।। 



तमसा नदी के किनारे क्रौंच पक्षी, 

का अति सुन्दर, प्यारा जोडा़ था।

मारा शिकारी ने वाण,

करुण क्रन्दन से, 

हा-हाकार उच्चारा था।। 


महर्षि के श्रीमुख से निकले, 

अद्भुत शब्दों का उच्चारण। 

लय-छन्दबद्ध संस्कृत श्लोकोच्चारण, 

महर्षि बने आदि कवि श्रीरामायण।। 


माता सीता को अपने आश्रम, 

में शरण दिलाने वाले। 

लव-कुश का भरण पोषण कर, 

रामायण का पाठ पढ़ाने वाले।। 


रत्नागिरी डाकू से, 

वाल्मीकि कहलाने वाले। 

तपस्या में लीन होकर, 

शरीर में दीमक पालने वाले।। 


महाकाव्य रामायण के रचनाकार, 

वाल्मीकि कहलाने वाले। 

कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें, 

विश्व बन्धुत्व, भाई चारे का सन्देश देने वाले ।।


रचना 

बसन्ती शाह (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० कुमडी़, 

ब्लॉक- जखोली, रुद्रप्रयाग




🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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