राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी - श्रीमती वसन्ती शाह जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद  रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती वसन्ती शाह जी की कविता-


✍️ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी


दो अक्टूबर को जन्मे,

भारत माँ के सच्चे लाल थे।

भारत माता की रक्षा करने के लिए,

अहिंसा जैसे उनके परम हथियार थे।। 




सत्य, अहिंसा का नारा देकर,

भारत को आजाद कराया ।

चरखा चलाकर खादी पहनो,

स्वदेशी बनो का मन्त्र दिया।।


 देश के लिए जीते थे,

और देश के लिए मरते थे।

इसीलिए तो देशवासी,

उन्हें राष्ट्रपिता कहते थे।।


बाबा करमचंद गाँधी की वह अनोखी सन्तान,

पुतलीबाई के राज दुलारे थे।

गुजरात की धरती को धन्य करने वाले,

बच्चों के प्यारे, दुनिया के न्यारे थे।।


 स्वच्छ भारत अभियान का था सपना,

अब पूरा करना हम सब का काम है।

दुनिया में जीवित रखना,

हमें बापूजी का नाम है।।


🙏 रचना-

वसन्ती शाह (प्र० अ०)

रा० प्रा० वि० कुमड़ी

वि०ख०- जखोली, रूद्रप्रयाग



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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