गाँधी जी के बचपन से - कु० साक्षी पंवार
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से रा० प्रा० वि० नकोट जुवा की छात्रा कु० साक्षी पंवार जी द्वारा संकलित प्रेरक प्रसंग-
✍️गाँधी जी के बचपन से
मोहनदास गाँधी जी का बचपन पोरबन्दर में ही बीता। 7 वर्ष की उम्र में उन्हें राजकोट की एक पाठशाला में भर्ती करा दिया गया।
12 वर्ष की उम्र में वे हाई स्कूल ( मैट्रिक )में पहुंँच गए थे। उनके साथ हाई स्कूल की प्रथम वर्ष की परीक्षा के समय एक महत्वपूर्ण घटना घटी। विद्यालय निरीक्षक श्रीमान जाइल्स स्कूल के निरीक्षण के लिए आए थे। उन्होंने विद्यार्थियों से अंग्रेजी में 5 शब्द लिखवाए। मोहनदास गांँधी ने उनमें से एक शब्द 'कैटल' की स्पेलिंग गलत लिखी थी। अध्यापक ने इशारे से उन्हें पास वाले लड़के की कॉपी देकर ठीक करने के लिए कहा, परन्तु बालक मोहनदास ने ऐसा नहीं किया पूरी कक्षा में उन्हीं की काॅपी में शब्द गलत था। निरीक्षक के जाने के बाद अध्यापक ने गांँधी जी को फटकारा लेकिन गांँधी जी ने कहा - "गुरुजी नकल करके मैं अपनी सत्य निष्ठा को कलंकित नहीं कर सकता था।"
ऐसी थी उनकी सत्य निष्ठा, जो उन्हें विरासत में अपनी मांँ से मिली थी।
संकलन-
कु० साक्षी पंवार (छात्रा)
कक्षा- 4
रा० प्रा० वि० नकोट (जुवा )
ब्लॉक- थौलधार, टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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