चलना हमारा काम - श्रीमती दमयन्ती राणा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दमयन्ती राणा जी की कविता-
✍️चलना हमारा काम
गति प्रबल पैरों में भरी,
फिर क्यों रहूँ दर-दर खडा़।
जब आज मेरे सामने,
है रास्ता इतना बडा़।।
कुछ कह दिया कुछ सुन लिया,
कुछ बोझ अपना बंट गया,
अच्छा हुआ तुम मिल गये,
कुछ रास्ता ही कट गया।।
मैं पूर्णता की खोज में,
दर-दर भटकता ही रहा।
प्रत्येक पग पर कुछ न कुछ,
रोडा़ अटकता ही रहा।।
जीवन इसी का नाम है,
चलना हमारा काम है।
कर्तव्य पथ पर साथ देना,
परम-धर्म और सम्मान है।।
🙏 रचना -
दमयन्ती राणा (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी,
ब्लाॅक- कर्णप्रयाग, चमोली गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
अद्भुत अकल्पनीय भाव लेखनी को नमन
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