दोस्त - श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता-
✍️ दोस्त
दोस्त वो नहीं होते हैं जो,
दोस्त को धोखा देते हैं।
अपने मतलब के लिए ही,
चिकनी-चुपड़ी बातें करते हैं।।
होते हैं दोस्त वहीं जो,
उसे सही राह दिखाते हैं।
उसका जीवन भटक न जाए
उसको समझाते हैं।।
दोस्त से ही तो दोस्त,
अपनी सब बातें बतलाते हैं।
जो बात न कह सके किसी से,
वो अपने दोस्त को बतलाते हैं।।
अच्छे दोस्त की दोस्ती इन्सान,
कभी भी भुला नहीं पाते हैं।
उसकी हर कही बात को,
जीवन भर अपनाते जातें हैं।।
अच्छी दोस्ती ही अच्छी संगत,
बुरी दोस्ती होती बुरी संगत।
छोड़ दो बुरी संगत अभी तुम
अपनाओं लो अच्छी तुम संगत।।
सब बुराई होगी दूर,
नहीं भटक पाओगे तुम।
अगर तुम्हारी दोस्ती होगी,
अगर दोस्तों में प्रेम का दम।।
🙏 रचना-
हेमलता बहुगुणा (पूर्व प्र०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० सुरसिंहधार
चम्बा, टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
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