दीपों का त्योहार - सुश्री विजयलक्ष्मी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री दीपावली पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन सुश्री विजयलक्ष्मी जी की कविता -
दीपों का त्योहार
आ गया दीपों का त्योहार,
छा गया मन में हर्ष अपार।
लक्ष्मी मैया पधारो मेरे आँगन में।।
रंगोली और चौक पुराएँ,
ड्यौढ़ी वन्दनवार सजाएँ।
गूँथी है पुष्पों की माल,
पधारो मेरे आँगन में।।
स्वच्छ और निर्मल नीलगगन है,
जगदीश्वरी तुमको नमन है।
आवें घर-घर चरण तुम्हार,
पधारो मेरे आँगन में।।
लक्ष्मी संग माँ शारदा माता,
तुम ही जग की भाग्य विधाता।
लेकर गणपति को साथ,
पधारो मेरे आँगन में।।
राजा और रंक वन्दन करते,
तुमसे सारे काज सँवरते।
जगमग है दीपों से रात,
पधारो मेरे आँगन में।।
सबकी दीन-दरिद्रता हर कर,
घर-घर धन और धान्य भरकर।
करने ममता की बरसात,
पधारो मेरे आँगन में।।
जड़ता और अज्ञान मिटाकर,
भेद-भाव मन कलुष हटाकर।
मैया भरने ज्ञान प्रकाश,
पधारो मेरे आँगन में।।
🙏रचना-
सुश्री विजयलक्ष्मी (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० चंद्रनगर
वि० ख० -रामनगर
जनपद - नैनीताल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
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