मन का तम ना भगाया तो क्या फायदा - श्री सोमपाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षक साथी श्री सोमपाल जी की कविता -
✍️मन का तम ना भगाया तो क्या फायदा?
दूसरों को तो तुम थे जगाते रहे,
खुद को ना जगाया तो क्या फायदा?
ज्ञान के रंग में सबको रंगते रहे,
खुद को ना रंगाया तो क्या फायदा?
दीप इतने जलाये कि घर आँगन,
सबके सब रोशनी पे फिदा हो गये।
इतने फोड़े पटाखे जलीं फुलझड़ी,
तारे सब आसमाँ से विदा हो गए।।
रोशनी कर जहाँ से भगा तम दिया,
मन का तम ना भगाया तो क्या फायदा ?
दूसरों को .....
देखो हर्षित ये सारा गगन हो गया,
देखकर ये तुम्हारे जलते दिये।
मेरा दिल भी खुशी से मगन हो गया,
देख संदेश शुभकामनाओं भरे।।
छल, कपट, ईर्ष्या मन में पाले रहे,
तो शुभ संदेश देने से क्या फायदा?
गर सदा मन तेरा जो दुआयें न दे,
ऐसी शुभकामनाओं से क्या फायदा ?
दूसरों को ....
फोन कर हाले दिल पूछते तो रहे,
पर सम्मुख कभी भी आते नहीं।
सामने तो बड़ा मीठा गाते रहे,
पीठ पीछे कभी बतियाते नहीं।।
जीवन भर तो रिश्ते बनाते रहे,
ना सही से निभाया तो क्या फायदा ?
दूसरों को.....
🙏 रचना
सोमपाल सिंह (स०अ०)
रा० उ० मा० वि० ओखलढूंगा
क्षेत्र- कोटाबाग, नैनीताल
(उत्तराखण्ड)
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
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