संविधान निर्माता तुम्हें प्रणाम-श्रीमती बसन्ती शाह

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय संविधान दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती बसन्ती शाह जी की कविता- 


🙏✍️संविधान निर्माता तुम्हें प्रणाम 


कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें, 

संविधान के निर्माता।

कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें,

भारत के भाग्य विधाता।।



उजड़े भारत की नींव डालने वाले,

भारत को एक सूत्र में बाँधने वाले। 

कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें,

समता का दीप जलाने वाले।।


नारी को अधिकार दिलाने वाले,

समाज में पुरुषों से कन्धा मिलाने वाले।

कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें,

भारत का भविष्य सँवारने वाले।।


नारी शोषण करने वालों को,

दण्ड व्यवस्था का कानून वनाने वाले।

कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें,

समता का दीप जलाने वाले।।


बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने वाले,

बाल श्रम को अपराध मानने वाले।

कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें,

विश्व बन्धुत्व की भावना जगाने वाले।।


🙏रचना:-

बसन्ती शाह (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० कुमडी़ 

वि० ख० - जखोली, रूद्रप्रयाग



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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