शहीद बिपिन रावत जी -श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-
🙏🇮🇳शहीद जनरल बिपिन रावत अमर रहें
16 मार्च सन् 1958 को,
उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले में जन्मे।
भारत के प्रथम रक्षा प्रमुख बनकर,
उत्तराखण्ड का आये नाम रोशन करने।।
धरती का चमकता हुआ सूरज,
आसमान का सितारा बन गया।
हर एक के दिलों में छाप छोड़,
पत्नी संग रावत जी चले गए।।
अपनी बीरगाथा का सृजन कर,
हर एक को नयी राह दिखाकर।
सारे जहाँ हेतु नया इतिहास रचकर,
एक महान हस्ती यूँ चले गयी।।
तीनों सेनाओं की थे वो शान,
सारे देश को था बड़ा अभिमान।
बस आपके चले जाने पर सदा,
मात्र रह गया यादों का गुणगान।।
हर एक वीर को वीरता की,
सीख सिखाकर चले गए।
पत्नी संग सी० डी० एस० रावत जी,
सबको रुलाकर चले गए।।
ये धरती आपकी आभारी रहेगी,
आँच जब-जब भी इस पर आएगी।
पल-पल आपका स्मरण कर,
आपके शौर्य की गाथा गुनगुनाएगी।।
ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा,
इतिहास इसे सदा याद रखेगा।
भारत माता की जयकार संग,
बिपिन रावत नाम गुंजायमान होगा।।
🙏रचना :-
देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी
ब्लॉक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
वाह बुवा जी सुंदर सृजन
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर....
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