लोक संस्कृति दिवस - श्रीमती सरोज डिमरी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  लोक संस्कृति दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-


लोक संस्कृति दिवस


खुद पर भरोसा जीत है,

 विश्वास मन का मीत है।

 ले हिलोरें सत्यता की,

 यह प्रतिष्ठा की जीत है।।



 प्राण प्रण और प्रयत्नों से,

जीवन शाश्वत संगीत है।

कर दे जो खुद न्योछावर,

बनता वही समय का मीत है।।


महान सामाजिक कार्यकर्ता,

इन्द्रमणि बड़ोनी जन्मदिवस,

लोक संस्कृति का बन गया,

लोक संस्कृति-दिवस।।


 1977 विधानसभा चुनाव में,

 निर्दलीय जीत से। 

मन में अतिरेक विश्वास हुआ,

कर्तव्यनिष्ठा से।।


शिक्षा का विकास,

विद्यालय उच्चीकृत का कार्य हुआ।

जनहित आन्दोलन-परोपकार से,

साहस का संचार हुआ।।


"उत्तराखण्ड का गांँधी" नाम से नवाजे गए,

अपने प्राणान्त तक संघर्षरत् आप रहे।

धन्य-धन्य गढ़वाल-अखोड़ी के लाल,

 सदा अमर आपका नाम रहे।।


🙏रचना-:


सरोज डिमरी (स०अ०)

रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर

वि० ख० कर्णप्रयाग, चमोली



🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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