लोक संस्कृति दिवस - श्रीमती किरन नैथानी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  लोक संस्कृति दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-पौड़ी  गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती किरन नैथानी जी द्वारा रचित कविता-



लोक संस्कृति दिवस


उत्तराखण्ड के इतिहास में,

चौबीस दिसम्बर की अपनी शान। 

जन्मे गाँव अखोड़ी टिहरी में,

इन्द्रमणि बड़ोनी महान।।



लोक संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर,

किया आपने गुणगान।

जन्म दिवस लोक संस्कृति दिवस है,

मिला आपको यह सम्मान।।


नेता, अभिनेता, लेखक,

नर्तक, गायक, गीतकार। 

उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के,

तुम ही थे सूत्रधार।।


सरल, सहज व्यक्तित्व आपका,

दुबला सा आकार।

अहिंसक आन्दोलन चला,

राज्य का सपना किया साकार।।


जन-जन का नमन तुम्हें है,

उत्तराखण्ड के गाँधी।

लोक संस्कृति के रक्षक,

स्वर संगीत साधना साधी।।


संघर्ष शक्ति के बल पर आपके,

विकास की लहरें छायी।

उत्तराखण्ड के अमर सपूत से,

सबने प्रेरणा पायी।।


रीति-रिवाज, मेले-उत्सव,

पूजा पद्धति, खान-पान,

लोक संस्कृति की है हमारी,

अपनी विशिष्ट पहचान।।


परम्पराएँ, सांस्कृतिक विरासत,

सभ्य संस्कृति का है सहारा।

लोक संस्कृति का संरक्षण,

संवर्द्धन है दायित्व हमारा।।


किरन नैथानी (प्र०अ०)

रा० उ० प्रा० वि० नगर क्षेत्र श्रीनगर

पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड



🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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