मार्गशीर्ष पूर्णिमा - श्रीमती डाॅ० आभा भैंसोड़ा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में मार्गशीर्ष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती डाॅ० आभा भैंसोड़ा जी द्वारा रचित कविता-
मार्गशीर्ष पूर्णिमा
मार्गशीर्ष सन इक्कीस की,
आज पूनम की रात।
मनोकामनाओं के पूर्ण,
होने की बरसात।।
अगहन पूर्णिमा, बत्तीस पूर्णिमा,
कई नामों से सुसज्जित।
दान पुण्य व शुभ कर्मफल,
गुना अधिक है बत्तीस।।
असाध्य कष्ट निवृत्ति होती,
अगहन पूर्णिमा व्रत को कर।
दुर्भाग्य बदलता सौभाग्य में ,
आज स्नान, व्रत रखकर।।
निस्वार्थ, असहाय सहायता,
खोले समृद्धि द्वार।
मासों में मैं मार्गशीर्ष,
कहते कृष्ण मुरारि।।
कृष्ण भक्ति का श्रेष्ठ मास है,
मार्गशीर्ष यह मान।
शंख पूजन से लक्ष्मी आह्वान,
दूर विकार करे, चन्द्रपूजन।।
शंख में तीर्थ का जल भर करें,
विष्णु सहस्रनाम स्मरण।
सकारात्मक का आह्वान होवे,
नकारात्मकता का हरण।।
🙏 रचना :-
डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०)
रा० प्रा० वि०- देवलचौड़
ब्लाॅक - हल्द्वानी, नैनीताल
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
,अति उत्तम, 🙏👌💐
जवाब देंहटाएंAti sundar kavita👌👌
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