नूतन वर्ष - श्रीमती दीक्षा जोशी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आँग्ल नववर्ष के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दीक्षा जोशी जी द्वारा रचित कविता-


🙏✍️नूतन वर्ष


नूतन वर्ष तेरे आवन की,

सबको बड़ी प्रतीक्षा रे।

तेरे आवन पर कैसा,

मनभावन लगे, ये इच्छा रे।।


क्या तेरे आते ही सबके,

दूर हों दुख और पीड़ा रे।

क्या भूखा भोजन पा जावे,

बिन माँगे तब भिक्षा रे।।



भवन हीन गृह आश्रय पावे,

रोजी रोटी हर घर आवे।

क्या दुखिया, सुखिया बन जाए?

तो मैं भी करूँ प्रतीक्षा रे।।


जब हर पेट रोटी को पावे,

हर सर को इक छत मिल जाए। 

ढकने को तन कपड़ा लत्ता,

तो ही वर्ष हो नूतन रे।।


गर बीते हर वर्ष की तरह,

ये साल भी केवल सरके।

समस्या वैसी ही खड़ी रहे,

तो कैसा नूतन वर्ष अरे।।


चलो मिलाकर हाथ चलें,

हर आँगन, छत, रोटी आवे।

मिलकर करें जतन कुछ ऐसा,

सब लगे नूतन-नूतन रे।।


नूतन वर्ष तेरे आने की। 

तब होगी मुझे प्रतीक्षा रे।।



🙏रचना-:


दीक्षा जोशी (प्र० अ०)

रा० प्रा० वि० चोरगलिया

वि० ख०- हल्द्वानी, नैनीताल


🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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