उत्तरायणी पर्व - डाॅ० आभा सिंह भैंसोड़ा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में मकर संक्रान्ति पुण्य पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन डाॅ०आभा सिंह भैंसोड़ा जी द्वारा रचित कविता-


उत्तरायणी पर्व 


धनु से मकर राशि में,

सूर्य विचरण को आते हैं।

दक्षिणायन थे सूर्य अब जो,

उत्तरायण चले आतेहैं।।



यह समय महत्वपूर्ण होता है,

क्षमता द्विगुणित बढ़ जाती है।

पूष की ठिठुरन कम होती है, 

तपिश सूर्य की बढ़ जाती है।।

 

 दक्षिणायन होता सूर्य जब,

 खर मास आरम्भ हो जाते हैं।

 उत्तरायण सूर्य के आते ही,

 शुभकार्य श्री गणेश हो पाते हैं।।

 

 उत्तरायण में प्रवेश होने से,

 मकर संक्रान्ति कहलाती है।

 पवित्र नदी स्नान से इस दिन,

 शुभ फल प्राप्ति हो जाती है।।


गीता में भीष्म पितामह ने भी,

इसी दिन प्राण त्यागे थे।

दन्तकथानुसार उत्तरायण प्राण विसर्जन से, 

मोक्ष द्वार खुल जाते हैं।।


🙏 रचना - :

डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०)

रा० प्रा० वि०-देवलचौड़

ब्लाॅक- हल्द्वानी, नैनीताल




🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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