राष्ट्रीय सेना दिवस - श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय सेना दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद-पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित कविता-


🙏🇮🇳✍️राष्ट्रीय सेना दिवस 


सियाचिन की ऊँची बर्फीली चोटी,

जहाँ ऑक्सीजन तक कम हो जाती।

प्रतिकूल जलवायु होने के कारण,

स्वास्थ्य तक खराब कर जाती।।


राजस्थान जैसलमेर जैसे स्थानों में,

जहाँ पर भीषण गर्मी पड़ती है।

कहर बरपाता प्रचण्ड तापमान,

आसमान से मानो आग हो पड़ती है।।



इन हालातों में भारतीय सैनिक भिड़ते रोज,

पाकिस्तानी-चीनी सैनिकों से लड़ते रोज।

इस तरह वे सीमाओं की रक्षा करते हैं,

और आराम से तब हम घर में रहते हैं।।


सीमाओं की निगरानी करते हुए,

कभी ऐसी भी परिस्थितियाँ बनती हैं।

भारत माता की सुरक्षा करने में,

प्राणों की आहुति देनी पड़ती है।।


उन शहीदों को श्रद्धाञ्जलि अर्पित करने,

अमर जवान ज्योति पर सलामी देते हैं।

अदम्य साहस दिखाने वाले सैनिकों को,

बहादुर सेना मैडल व पुरुस्कार देते हैं।।


15 जनवरी 1949 को भारतीय सेना के,

प्रथम फील्ड मार्शल करिअप्पा बने जब से।

वीर सैनिकों को समर्पित यह दिन,

सेना दिवस के रूप में मना रहे तब से।।


🙏रचना-:

मनोज घिल्डियाल (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० कलीगाड

वि०ख०- रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल


🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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