सूरज को भी ठण्ड लगी है - श्रीमती दीक्षा जोशी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दीक्षा जोशी जी द्वारा रचित कविता-
🔆✍️सूरज को भी ठण्ड लगी है
बर्फीले मौसम में देखो,
सूरज को भी ठण्ड लगी है।
सर्दी इतनी ज्यादा हो गई,
कोहरे की दीवार लगी है।।
बादल वाली ओढ़ रजाई,
बार-बार बाहर को झाँके।
केवल मुँह को बाहर करके,
ऊपर से नीचे को ताके।।
हिम्मत उसकी नहीं हो रही,
बिस्तर से बाहर आने की।
पर मम्मी कहती है उससे,
उसकी तो ड्यूटी जाने की।।
कोई एक गरम प्याला तो,
कॉफी का उसको पकड़ा दे।
सर से लेकर पैर तलक,
कोई ऊनी कपड़े पहना दे।।
फिर वो भी बाहर निकलेगा,
सबकी सर्दी दूर करेगा।
जग-मग, जग-मग, जग-मग करके
सारा जग रोशन कर देगा।।
🙏 रचना-:
दीक्षा जोशी (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० चोरगलिया,
ब्लॉक- हल्द्वानी, नैनीताल
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
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