नारी की जिम्मेदारियाँ - श्रीमती दमयन्ती राणा जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती दमयन्ती राणा जी द्वारा रचित कविता-

✍️नारी की जिम्मेदारियाँ


जब एक लड़की किसी घर में जन्म लेती है, 

उस घर को पूरी तरह जगमगा देती है।

वो एक नन्ही-सी कली अपने पापा की परी होती है, 

माँ की प्यारी और भाई की दुलारी होती है।।


मासूमियत को छोड़कर अब वो, 

समझदारी की सीढियाँ चढ़ने लगती है।

वो कली बाबुल की बगिया छोड़कर, 

अब किसी और के घर की फूल बनती है।।



माँ बनकर अपने बच्चों को सम्भालती है, 

उनके मन के दुख को समझ जाती है।

अपने घर के हर सदस्य का चेहरा देखकर, 

वो अपनी जिम्मेदारियाँ अच्छे से निभाती है।।


अपने बच्चों की खुशी के लिए, 

खुद की खुशी को भूल जाती है।

वो एक लड़की सबका ध्यान रखती है, 

बस खुद का ध्यान रखना भूल जाती है।।


वो कभी बेटी, बहू और पत्नी, 

तो कभी माँ बन जाती है।

वो एक लड़की इस तरह से, 

सारे रिश्ते जिम्मेदारियाँ निभाती है।।


🙏 रचना-:


दमयन्ती राणा (स०अ०)

रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी

वि०ख०- कर्णप्रयाग, चमोली




🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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