राष्ट्रीय एकता - श्रीमती गंगा आर्या
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती गंगा आर्या जी द्वारा रचित कविता-
🙏🇮🇳राष्ट्रीय एकता
हम एक हैं हम एकता दिखलायेंगे,
आने वाली पीढ़ी को हम मानवता सिखायेंगे।
न कोई ऊँच-नीच, न हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई,
हिन्द देश के निवासी हम सब हैं भाई-भाई।।
जिसने सोचा हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई हैं,
हिन्द देश का वो निवासी सबसे बड़ा कसाई है।
हम एक हैं, हम एकता दिखलायेंगे,
आने वाली पीढ़ी को मानवता हम सिखायेंगे।।
आने वाली हर कठिनाई को मिलकर हम हटायेंगे,
भेदभाव को छोड़कर हम एकता दिखलायेंगे।
भीनी-भीनी एकता की खुशबू हम फैलायेंगे
आने वाली नस्लों को इससे वाकिफ करायेंगे।।
भ्रष्टाचार का फैला आँचल जड़ से हम उखाड़ेंगे,
ज्ञान का लेके पुञ्ज अज्ञानता हटायेंगे।
शिक्षा की लेके मशाल देश को आगे बढ़ायेंगे,
भारत को संगठित करके शान्ति देश में लायेंगे।।
करके विनाश छल कपटी का सम समाज बनायेंगे,
ढोंगी, पाखण्डी, व्यभिचारियों से विश्वास जनता का हटायेंगे।
दगाबाज और गद्दारों को अब तो सबक सिखायेंगे,
चमचों के कुचक्र व्यूह से मुक्ति जनता को दिलायेंगे।।
हम एक हैं हम एकता दिखलायेंगे,
आने वाली पीढ़ी को हम मानवता सिखायेंगे।।
🙏 रचना-:
गंगा आर्या (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० भट्टीगाँव
वि० ख० - बेरीनाग, पिथौरागढ़
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
बहुत शानदार मैम ।आपको हार्दिक शूभकामनाए
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
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