कर्नाटक राज्य गीत - श्रीमती उषा गौड़ जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती उषा गौड़ जी द्वारा रचित कविता-
🙏✍️कर्नाटक राज्य गीत
कर्नाटक राज्य है वन्दन तेरा,
हम सब करें अभिनन्दन तेरा।
मुल्लियान गिरि महान तेरे सर पर ताज है,
अरब महासागर तेरे चरणों में विराज है।।
गोवा, तेलंगाना, केरल तक फैला आँगन तेरा,
हम सब करें अभिनन्दन तेरा।
भद्रा, चक्रा नदियाँ तेरे गले में विराजे हैं,
भिन्न-भिन्न धर्मों का ये अनोखा राज है।।
वीर शैव की महिमा है दर्पण तेरा,
हरी धरती है फूल आँचल तेरा।
भिन्न-भिन्न भाषाओं में रूप तेरा सजता,
छोटी-छोटी क्यारियों में मन मेरा हँसता।।
बंगलौर, मैसूर स्थल तेरे राज्य की शान हैं,
जिसमें बसते हैं हमेशा भारत के प्राण हैं।
बिरुपाक्ष टेम्पल, हम्पी यहाँ विराजमान हैं,
मुल्लियान गिरि महान तेरे सर पर ताज है।।
🙏रचना-:
उषा गौड़ (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० डोईवाला
ब्लॉक- डोईवाला, देहरादून
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
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