ऋतुराज बसन्त-श्रीमती लक्ष्मी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बसन्त पञ्चमी पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती लक्ष्मी जी द्वारा रचित कविता-
🌻🌻ऋतुराज बसन्त🌻🌻
पतझड़ का अब हो रहा है अन्त,
आ गया है मन भावन बसन्त।
पीली साड़ी पहने सजी है धरा,
फैली है फूलों की सुगन्ध अनन्त।।
आ गया है पावन बसन्त,
खुशबू फैलाते पुष्पित पुष्प।
पेड़ पौधों की नई कलियाँ,
खोल रही हैं नए कपोल।।
चिड़िया चहक रही है पेड़ों पर,
कोयल की बोली लगती सुन्दर।
चारों ओर माँ सरस्वती,
ज्ञान का प्रकाश फैलाती।।
सिमटने लगी है सर्दी फैली अनन्त,
आ गया है ऋतुराज बसन्त।
मोहित करता है सबको ऋतुराज
घर आंँगन को बना देता है गुलजार।।
🙏 रचना-:
लक्ष्मी (स०अ०एल०टी० सामान्य)
रा० इ० का० मल्ला भैंस्कोट
वि०ख०- मुनस्यारी, पिथौरागढ़
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
बहुत सुन्दर
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