मैं आजाद हूँ - श्रीमती सुनीता भटनागर जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी स्व० चन्द्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुनीता भटनागर जी द्वारा रचित कविता-


‌‌ 🙏🇮🇳मैं आजाद हूँ

 

23 जुलाई 1906 को जन्मा, 

वो बांँका वीर निराला था। 

वीर, बलिष्ठ, जाँबाज, बहादुर, 

वो देश भक्त मतवाला था।। 


पूछा जाता जब उनका नाम, 

गर्व से "आजाद" बताते थे। 

पिता का नाम स्वाधीनता, 

और घर जेलखाना बताते थे।। 



जिनका जीवन-दर्शन देशभक्ति, 

और हिम्मत जीवन परिभाषा थी। 

वह महानायक भारत-भू का, 

बस इन्कलाब ही भाषा थी।। 


वे आजाद थे, आजादी के लिए, 

संघर्ष किया था गोरों से। 

मैं आजाद हूंँ, आजाद ही मरूंगा, 

प्रण किया था खुद अपने से।। 


जिनके पराक्रम शौर्य से, 

दुश्मन भी थर्राता था। 

मातृभूमि की लाज बचाने को, 

जो कफन ओढ़ चला आया था।। 


वह आजाद था, पहचान आजादी, 

खुद एक मिशाल बनाई थी। 

जिनकी सिंह गर्जना से हर, 

हिन्दुस्तानी ने आवाज मिलाई थी।। 


आजादी का दीवाना 27 फरवरी 1931को, 

काम वतन के आ गया। 

सजा कफन माथे पर तिरंगा, 

वह हर दिल में हिन्दुस्तान बसा गया।।    


 🙏 रचना-:

 सुनीता भटनागर (प्र०अ०) 

राजकीय प्राथमिक विद्यालय पनिया मेहता

 भीमताल, नैनीताल


🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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