महाशिवरात्रि आयी है - सुश्री विजयलक्ष्मी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में महाशिवरात्रि पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन सुश्री विजयलक्ष्मी जी द्वारा रचित कविता-


🙏🕉️महाशिवरात्रि आयी है 


मन में खुशी छायी, 

महाशिवरात्रि आयी।

सृष्टि के अस्तित्व की, 

अधिष्ठात्री उतर आयी।। 


इस दिन शिव-शक्ति का, 

होता है सुखद मिलन।

करने को त्रिलोकी,

 बसुन्धरा में सन्तुलन।। 



अर्द्धचन्द्र सुशोभित, 

शीश गंग धार विराजे।

कर डमरू, त्रिशूल,

कण्ठ सर्प हार साजे।। 


परहित में भोलेनाथ, 

विष पी जाते हैं।

ऐसे कृपा निधान, 

नीलकण्ठ बन जाते हैं।। 


यह भोले भोलेनाथ, 

सबके प्यारे हैं।

अंग लपेटे मृगछाल। 

भस्म सबसे न्यारे हैं।।


यह आदिगुरु सृष्टि कर्ता-हर्ता,

 दयालु पालनहारे हैं।

यह अविनाशी घट-घट वासी, 

सबके सुख-दुःख के सहारे हैं।। 


नन्दी की सवारी संग, 

गणपति महतारी हैं।

जो भी पुकारे उनकी, 

हरते दुविधा सारी हैं।। 


ज्ञानियों के गुरु और, 

आचार्यों के आचार्य।

मुंहँ मांँगा वर दे देते, 

ऐसे परम औदार्य।। 


विधि-विधान, धन-धान्य, 

इन्हें न भाते हैं।

सीधी सरल भक्ति से, 

वश में  हो जाते हैं।। 


मस्त-मलंगा ,औघड़, 

दानी जटाधारी हैं।

महा वैरागी, कैलाश वासी, 

त्रिनेत्र धारी हैं।। 


🙏 रचना-:

सुश्री विजयलक्ष्मी (प्र०अ०) 

राजकीय प्राथमिक विद्यालय चन्द्रनगर

विकास खण्ड- रामनगर

जनपद- नैनीताल


🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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