आओ होली खेलें - श्रीमती भागीरथी पाण्डेय जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती भागीरथी पाण्डेय जी द्वारा रचित कविता-
🙏 आओ होली खेलें
प्रकृति सारी सज बैठी है,
करके सोलह श्रृंगार सखी री।
चारों दिशाएँ गूँज उठी हैं,
चैती, ठुमरी, फाग सखी री।।
बाग-बगीचे फूल खिले हैं,
जंगल खिले बुरांँश सखी री।
धरती सारी रंग गई है,
रंग गया आकाश सखी री।।
बाल-वृद्ध सभी रंगे हैं,
रंगे सब नर-नारी सखी री।
गली-गली में धूम मची है,
जुटी भीड़ भारी सखी री।।
बैर भाव आज दहन करें सब,
राग-द्वेश की जलाएँ होली सखी री।
प्रेम, भक्ति, सत्य अपनाकर,
जगाएँ हृदय का प्रह्लाद सखी री।।
प्रेम रंग में हम भी रंग जाएँ,
मलें अबीर, गुलाल सखी री।
स्नेहा सुधा सब पर छलकाएँ,
खुशियों की करें बौछार सखी री।।
व्यंग विनोद से सबको हँसायें,
रहे न कोई उदास सखी री।
गुझिया, पापड़, कचरी, मठरी,
गुड़ की घोलें मिठास सखी री।।
मन की सारी मलिनता धोकर,
बोलें मीठी बोली सखी री।
आओ सब मिल-जुलकर हम,
खेलें प्रेम की होली सखी री।।
🙏 रचना-:
भागीरथी पाण्डे (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० परमा
वि०ख० - हल्द्वानी, नैनीताल
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
बहुत ही सुन्दर रचना
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