शहीद दिवस- श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में शहीद दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-:
🙏✍️शहीद दिवस
23 मार्च 1931 वह दिन था,
गले में उनके फाँसी का फन्दा था।
भारत माँ की जय-जयकार संग,
तीनों ने हँसकर गले लगाया था।।
मातृभूमि की रक्षा के खातिर,
अपना सर्वस्व है अर्पण किया।
शहीद हुए तीनों वीर देकर जान,
आज हैं भारत की सच्ची पहचान।।
चाहे कहीं छपी उनकी तस्वीर न हो,
पर फिर भी महकती उनकी शान है।
वो जियें हैं बस उम्र बहुत थोड़ी सी,
पर आज भी उनका सच्चा सम्मान है।।
देशभक्ति के खातिर तीनों ने,
किया सदैव अपना समर्पण।
आज के दिन इन तीनों वीरों को,
करते हैं भावभीनी श्रद्धाञ्जलि का अर्पण ।।
🙏रचना
देवेश्वरी सेमवाल(स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी
ब्लॉक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड


बहुत बढ़िया..
जवाब देंहटाएंऐसी कविताएं बच्चों को अपना गौरवशाली इतिहास की जानकारी देने के लिए बहुत उपयुक्त हैं।
वाह बेहतरीन सृजन
हटाएं👍👍👍
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