नारी तू अभिनन्दनीय है - श्रीमती कुसुम भट्ट जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती कुसुम भट्ट जी द्वारा रचित कविता-
🙏🕉️नारी तू अभिनन्दनीय है
नारी तू पूजनीय है, वन्दनीय है,
सारे जहाँ में अभिनन्दनीय है।
कभी बेटी बनकर घर का आँगन महकाती,
तो कभी बहना बनकर भाई की कलाई सजाती।
पति के लिए तू सम्बल है बन जाती,
तो कभी माँ बनकर ममता है छलकाती।।
दिन का चैन घर गृहस्थी में लगाती,
रात की नींद बच्चों को सुलाने में गुजारती।
न कभी थकती है, न कभी रुकती है, दोहरी जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाती।।
बाबुल का घर छोड़ पति का घर स्वर्ग बनाती,
पूरा जीवन संघर्षों में है बिताती।
कोई बाधाएँ दु:ख और कष्ट आते तेरे जीवन में,
पर तू सब कुछ सहकर बाधाएँ पार कर जाती।।
तू घर का कोना-कोना है महकाती,
ममता छलकाती, प्रेम है लुटाती।
क्यों तुझे कमतर आँका जाये,
बिन तेरे सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जाती।।
नारी तू पूजनीय है वन्दनीय है,
सारे जहाँ में अभिनन्दनीय है।
🙏रचना🙏
कुसुम भट्ट (स० अ० गणित)
रा० इ० का०- कण्डारा
ब्लॉक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
bahut sunder rachna mam.
जवाब देंहटाएंV nice lines mem
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