मेहनती मजदूर- श्रीमती सुनीता भटनागर जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुनीता भटनागर जी द्वारा रचित कविता-:


मेहनती मजदूर 

       

नींव का पत्थर बन जो,

गगनचुम्बी इमारतें खड़ी करता है। 

पर मजबूर होता है झोपड़ी में रहने को,

बस एक लम्बी आह भरता है।।


जो दिन रात मेहनत कर,

पसीने से लथपथ हो जाता है।

पर दो जून की रोटी मिल जाए तो,

चेहरे पर उसके नूर आ जाता है।।



मजदूर है, वो पर मजबूर नहीं,

अपनी मेहनत का खाता है।

स्वाभिमानी है, सम्मान करता है,

पर सम्मान कब वह पाता है।।


कर्मशील है, देश की नींव है,

आओ उसका सम्मान करें।

ऊँच-नीच का भेद मिटाकर,

श्रमिक भाई को प्यार करें।।


विकल है, दुखी है, श्रमिक आजकल,

आओ मिल कुछ उपकार करें।

मजदूरी बढ़ा, भविष्य निधि देकर,

सम्मानित जीने का आधार धरें।।


बच्चों को, नारियों को शिक्षा मिले,

गरीबी मिटे सब श्रमिकों की,

बूढ़े श्रमिक पेंशन पाएँ,

खाई पटे अब गरीबी की।।


कोठी और इमारतों वाले,

आँखें खोलो विचार करो।

पत्थर तोड़, तुम्हें महल दिया है,

उसका भी कुछ ध्यान धरो।।


एक मई 'मजदूर दिवस' के रूप में,

मनाना पर्याप्त नहीं।

जज्बा मेहनत का है जिसमें इतना,

जीवन उसका क्यों खुशहाल नहीं।।


ठान ले अगर हम मन में,

दृढ़ निश्चय हो हम सबका।

तो देश का हर मजदूर निश्चय ही,

सम्मानित जीवन जी सकता।।


🙏 रचना-

सुनीता भट्नागर (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० पनिया मेहता

वि० ख०- भीमताल, नैनीताल



🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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