माँ - श्रीमती भागीरथी पाण्डे जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में मातृ दिवस पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती भागीरथी पाण्डेय जी द्वारा रचित कविता:-


🙏🕉️मांँ 

अच्छा बुरा सब आँचल में समेटे,

धरती जैसी सहनशील है माँ।

मुश्किलों के सामने डटी रहे,

हिमालय जैसी अडिग है माँ।।


तपती धूप में शीतल छाँव है माँ,

भागते शहर में ठहरी गाँव है माँ।

अन्धेरे में जलता दिया है माँ,

लव-कुश बनाये वो सिया है माँ।।



कभी कठोर कभी फूल सी कोमल,

रहती साथ सदा होकर भी ओझल।

सबके हिस्से का प्यार बाँटती है माँ,

टुकड़े-टुकड़े खुद भी बाँटती है माँ।।


रुकती न कभी, थकती न कभी,

सूरज सी नियमित चलती है माँ।

देख बच्चे की मुस्कान सुबह की,

पहली किरण सी चमकती है माँ।।

🙏 रचना-:

भागीरथी पाण्डे (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० परमा, 

ब्लॉक- हल्द्वानी, नैनीताल



🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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