नशा मुक्त - श्रीमती सरोज डिमरी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में नशा उन्मूलन परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:
नशा मुक्त
ना कर तू इसका यह फैशन,
होत बुरी लत ये, जग माही।
देखत तू इसका यह मंजर,
होत बुरी गत देखत जायी।।
नाश करें धन देहन का यह,
होत बुरा इससे कुल का ही।
आदि बने, जब हो मन दुर्बल,
त्याग करो इसका तुम ताही।।
जो कर दो तुम दूर इसे तब,
मौलिकता तुम में छप जाती।
दूर करो इन बातन को तुम,
जो सब में मय यूँ छलकाती।।
दौलत मान सभी उड़ जावत,
होत नशा जग में भय भारी।
दूर नशा कर दो तुम तो यह,
मानव जीवन हो उपकारी।।
सेवन सोमरसी बनते जब,
शौक सदा लगता नित का ही।
जीवन का मत नाश करो तुम,
सोच, भला मिलता फिर नाही।।
रचना-:
सरोज डिमरी (स०अ०)
रा०आ० उ० प्रा० वि० गौचर
ब्लॉक- कर्णप्रयाग, चमोली
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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