पर्यावरण बचाओ - श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में पर्यावरण दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-:
🌍🌳🦜पर्यावरण बचाओ
परि और आवरण मिलकर है जो,
वही कहलाता है पर्यावरण।
इसके चहुँ ओर है जो विराजमान,
वही है पर्यावरण की सच्ची शान।।
आओ सब मिल इस धरती को बचायें,
भाँति-भाँति के वृक्ष लगा हम इसे सजायें।
वृक्ष लगाकर चलो मिल पुण्य कमायें,
चहुँ ओर के वातावरण को शुद्ध बनायें।।
चलो वृक्ष लगायें इस माटी को बचायें,
चहुँ ओर के वातावरण को हम सजायें।
हवा, पानी, सब है वृक्षों का वरदान,
हर प्राणी के जीवन में भरते हैं प्राण।।
सम्पूर्ण जीव-जगत के हैं ये आसरा,
परोपकारी होता है इनका जीवन सारा।
सम्पूर्ण जगत को देते हैं ये घर, हवा, पानी,
हर एक प्राणी के जीवन की करते निगरानी।।
सब मिल अभियान चलायेंगे, वृक्ष लगायेंगे,
अपने गाँवों को हम मिल स्वर्ग बनायेंगे।
हर कार्य सब मिलकर साथ निभायेंगे,
और अपने जीवन को आनन्दमय बनायेंगे।।
जब ये वृक्ष पूर्ण रूप से फूलेंगे, फलेंगे,
तो हमें शुद्ध हवा और शुद्ध पानी देंगे।
प्रदूषण को ये हमसे दूर भगायेंगे,
हर-एक का जीवन स्वस्थ बनायेंगे।।
आओ सब मिल वृक्ष लगाओ, वृक्ष बचाओ,
सब मिलकर इस जीवन को सफल बनाओ।
आओ मिलकर सब एक साथ शपथ लेते हैं,
पर्यावरण बचाने, इसे सजाने में आगे आते हैं।।
🙏रचना :-
देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी
ब्लॉक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड


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