धूम्रपान-श्रीमती सन्नू नेगी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में नशा उन्मूलन के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी द्वारा रचित कविता-:
🚭✍️धूम्रपान
सब व्यसनों से दूर रहेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।
जीवन यह अनमोल है,
इसका नहीं कोई मोल है।।
देह ये देवालय बने,
ध्यान योग में मन लगे।
सदैव प्रसन्नचित रहेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
अच्छा घर परिवार बने,
व्यसन रहित समाज बने।
सब प्रतिज्ञा लेकर रहेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
बीड़ी सिगरेट जब न बिकेगा,
कोई नहीं फिर इसे पियेगा।
सभी धूम्रपान से दूर रहेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
जन-जन को जगाना है,
धूम्रपान, शराब से बचना है।
स्वस्थ समाज का विकास करेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
स्वस्थ और मस्त रहेंगे,
धूम्रपान जब हम न करेंगे।
जन जन से अब ये कहेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
तम्बाकू, गुटका या हो बीड़ी,
व्याधियों की ये सब सीढ़ी।
चलो सब यत्न करेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
जहर से यह जहरीला,
खत्म कर इसकी लीला।
फेफड़े नहीं खराब करेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
सुनो! देश के नवयुवकों,
फेंको दूर इस तम्बाकू को।
राष्ट्र हित के लिए जियेंगे,
धूम्रपान से सदा बचेंगे।।
रचना:-
सन्नू नेगी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० सिदोली
वि० ख०- कर्णप्रयाग
चमोली, उत्तराखण्ड
🙏संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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