पर्यावरण धरा की शान-श्रीमती सरोज डिमरी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में पर्यावरण दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:
*पर्यावरण-धरा की शान*
पर्यावरण को सजाना है,
एक-एक वृक्ष लगाना है।
ये संकल्प सब को लेना है,
पर्यावरण को बचाना है।।
पर्यावरण दिवस मनाया,
जल-जंगल का मूल बताया।
वृक्षों को आधार बताया,
निर्भरता का बोध कराया।।
एक उम्मीद-आशा को जगाया,
धरती, सूर्य, पहाड़ मन को भाया।
जो याद था उसका चित्र बनाया,
कल्पना को रंगों से सजाया।।
फूल खिले हों चिड़िया गाती,
झर-झर-झर बहता पानी।
स्वच्छ हवा हो आती-जाती,
भू की सुंदरता को कहती।।
आज के दिन संकल्प लेना है,
एक पौध भूमि पर लगाना है।
उसे खाद पानी देकर के,
धरती माँ का रूप सजाना है।।
हाँ! मुझे भी वृक्ष लगाना है।
स्वच्छ हवा जल-जंगल के लिये।
वृक्षारोपण और संरक्षण से,
धरती माँ को फिर से सजाना।।
🙏 रचना-:
सरोज डिमरी (स०अ०)
रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर
चमोली, उत्तराखण्ड
🙏संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

.jpeg)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें