पर्यावरण संरक्षण-श्रीमती रेखा पुरोहित जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में पर्यावरण दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा पुरोहित जी द्वारा रचित कविता-:


🌳🦜🌻🌧️पर्यावरण संरक्षण


नग्न होती ये माँ धरती, 

कैसे सजेगी बिन तरूवर?

एक-एक पौधा रोपें हम सब,

गांँव-गली या कोई डगर।। 


कंक्रीट के जंगल बस गये,

चारों ओर जहाँ देखो।

कमी हवा पानी की हो गयी,

अब चाहे तुम जहाँ भी देखो।।



जो अब भी हम ना संभले, 

तो फँसेंगे विकट समस्या में।

बंजर धरती और सूखे नल,

बस देंगे यही विरासत में।।


नष्ट किया सौन्दर्य धरा का,

अब बारी संरक्षण की।

वृहद वृक्षारोपण करके,

वसुधा फिर से सजाने की।।

 


वृक्षारोपण करके हम सब,

आओ! अब धरती को सजायें।

साँसों पर जो संकट आया,

उसको भी हम दूर भगायें।।


आओ! सब मिल पेड़ लगायें,

सपने सुन्दर कल के सजायें।

मिलकर अब हम कसम ये लें, 

वृक्षों से अलंकृत भू को करें।।



🙏 रचना:-

 रेखा पुरोहित  (स०अ०)

रा० प्रा० वि० सौंराखाल 

वि० ख० जखोली, रुद्रप्रयाग


🙏संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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नष्ट किया सौन्दर्य धरा का,

अब बारी संरक्षण की।

वृहद वृक्षारोपण करके,

वसुधा फिर से सजाने की।।

 

वृक्षारोपण करके हम सब,

आओ! अब धरती को सजायें।

साँसों पर जो संकट आया,

उसको भी हम दूर भगायें।।


आओ! सब मिल पेड़ लगायें,

सपने सुन्दर कल के सजायें।

मिलकर अब हम कसम ये लें, 

वृक्षों से अलंकृत भू को करें।।



🙏 रचना:-

 रेखा पुरोहित  (स०अ०)

रा० प्रा० वि० सौंराखाल 

वि० ख० जखोली, रुद्रप्रयाग


🙏संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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