स्कूल चलो - श्रीमती गंगा आर्य जी

 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में    विद्यालय खुलने के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती गंगा आर्य जी की रचना


स्कूल चलो


गर्मी की छुट्टियाँ दबे पांँव चली गईं,

छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई।

प्यारे बच्चों! अब तुम वापस आ जाओ,

सूने पड़े स्कूल को आकर तुम सजाओ।।



नाना-नानी, मामा-मामी,

सब को अब तुम बाय-बाय कह दो।

नई शिक्षा नीति होने वाली है लागू,

आओ! नया कोर्स आकर तुम पढ़ो।।


होमवर्क मिला था जो तुमको,

उसको कहीं भूल न जाना तुम।

नयी सुबह की तैयारी करके,

नयी उमंग के साथ स्कूल आना तुम।।


अण्डे,केले, फल और दूध,

कर रहा है तुम्हारा इन्तजार।

आस लगाकर बैठा हुआ है,

मध्याह्न भोजन को आहार।।


खूब हो गयी मौज-मस्ती,

सिर्फ पढ़ाई अब करनी है।

सूनी पढ़ी है शाला तुम्हारी,

अब आकर ये सजानी है।।


सूना पड़ा है स्कूल आंँगन,

सूना पड़ा है विद्यालय भवन।

नजरें ढूंँढ रही बार-बार तुमको,

अपनी टोली लेकर जल्दी से तुम आ जाओ।।


🙏 रचना- 

गंगा आर्या (प्र०अ०)

 रा० प्रा० वि० भट्टीगांव

वि० ख० बेरीनाग, पिथौरागढ़


🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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