गुरु पूर्णिमा - श्रीमती सरोज डिमरी
प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में गुरु पूर्णिमा के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी की रचना:-
*गुरु पूर्णिमा*
महर्षि पराशर को कीर्तिमान पुत्र,
वेदव्यास रूप में मिला।
महाभारत की कथा का सृजक,
आषाढ़ पूर्णिमा को मिला।।
अपने पुत्र शुकदेव को,
सब पुराण कंठस्थ कराये।
अन्य शिष्यों को भी,
इसका अमृत पान कराये।।
महाभारत की कथा जन-जन को,
वैशम्पायन द्वारा सुनायी गयी।
तब से अब तक ये कथाएँ,
जन मानस ने जी भर गायीं।।
ऋषि वेदव्यास जी का जन्म,
आषाढ़ पूर्णिमा तिथि को हुआ।
तब से इस दिन को फिर,
गुरु पूर्णिमा कहा गया।।
आज महर्षि वेदव्यास जी के,
जन्मदिवस को हम मनाते हैं।
इसीलिए इस आषाढ़ पूर्णिमा को,
गुरु पूर्णिमा हम कहते हैं।।
वेदव्यास के ज्ञान से,
अपना ज्ञान बढ़ाते हैं।
धन्य भाग हमारे जो हम,
मानुष जन्म पाए हैं।।
गुरु आदरणीय जन होते,
जिनसे सीख सदा मिले।
वहीं प्रेरक-मार्गदर्शक बनकर,
हमें गुरु सा समान मिले।।
आओ! आज गुरु पूर्णिमा पर,
संकल्प हम भी यह करें।
नित नव सृजन और ज्ञान का,
सम्मान हम सदा करें।।
🙏रचना-:
सरोज डिमरी (स०अ०)
रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर
वि० ख० कर्णप्रयाग
जनपद चमोली, उत्तराखंड
🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
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