हरेला महोत्सव- श्रीमती गंगा आर्य जी
प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के लोक पर्व हरेला के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती गंगा आर्य जी की रचना:-
*"हरेला महोत्सव"*
हरेला महोत्सव की चली बयार,
प्रकृति में छायी खुशियों की बहार।
आओ हरेला पर्व मनायें,
हम सब मिलकर वृक्ष लगायें।।
प्रकृति का यह अनमोल उपहार,
हमको पेड़ लगाकर इसे सजाना है।
जीवनोपयोगी वृक्षारोपण करके,
इसअभियान को कामयाब बनाना है।।
वृक्षारोपण नहीं करोगे तो,
रिमझिम फुहार कहाँ पाओगे।
वृक्ष नहीं तो प्राणदायिनी हवा,
फिर कहांँ से पाओगे।।
अब ये प्रण हम सब को लेना है,
हर अवसर पर वृक्ष लगाना है।
चहुँ दिशि होगी जब हरियाली,
जीवन चहक उठेगा जैसे डाली-डाली।।
हरेला पर्व पर वृक्ष लगाकर,
धरती मांँ का आंँचल भर दो।
दागदार चुनरी धानी कर दो,
धरा पर पेड़-पौधों की वर्षा कर दो।।
इन्हीं से धरा मुस्काती है,
सजती और संँवरती है।
आओ हम सब वृक्ष लगायें,
धरती को हम स्वर्ग बनायें।।
हरेला पर्व की चली बयार,
चहुँ ओर छायी खुशियों की बहार।
घर, आँगन, मोहल्ले और विद्यालय सब,
अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनायें सब।।
वृक्षारोपण की कमान अब,
गुरुजनों ने सम्भाली है।
मिशन हो यह पूर्ण हमारा,
शपथ सभी को ये लेनी है।।
वृक्षारोपण कर ये धरती फिर,
हरी-भरी हमें करनी होगी।।
इनकी रक्षा हम जो करेंगे,
प्राणवायु ये हमको देगी।
आओ हरेला पर्व मनायें,
हम सब मिलकर वृक्ष लगायें।।
🙏रचना:-
गंगा आर्या (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० भट्टीगांव,
वि० ख०- बेरीनाग, पिथौरागढ़
🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड


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