पावस ऋतु -श्रीमती माधुरी नैथानी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद पौड़ी-गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती माधुरी नैथानी जी की कविता-:


📝पावस ऋतु 


पावस ऋतु सुन्दर आयी है, 

सुन्दरता को संग लायी है। 

बेल, लता, फूलों से सजकर, 

यह वसुन्धरा यूँ मुस्काई है।। 


चटक रही कोमल कलियाँ, 

बलखाती तट सारी नदियाँ। 

मन मयूरा नाचते रहते,

मेघ मल्हार हैं गाते फिरते।

मन पावस बेला छायी है,

पावस ऋतु सुन्दर आयी है।।



नीले अम्बर घिरते बदरा,

माथे गगन सजा है कजरा। इस 

चपला चंचल चहक रही, 

वन बगिया सारी महक रही है। 

पुलकित पवन हर्षायी है, 

पावस ऋतु सुन्दर आयीहै।।


हर डाली झूला झूल रहे, 

मन मीत पपीहा कूक रहे। 

सखियों सब पेंग बढ़ाती है, 

मेघ-मल्हार गाती हैं।

चातक उन्मादी छायी है,

पावस ऋतु सुन्दर आयी है।।


तन-मन चितवन,

कन-कन पुलकित।

चलती पवन सन-सन,

चूड़ी बजती खन-खन।

पायल धुन लहरायी है,

पावस ऋतु सुन्दर आयी है।।


दस्तक देतीं बचपन यादें, 

मन कहता है कूदें भागें। 

स्मृतियों की उन झीलों से, 

आँखे भर-भर आयी हैं।

नित जलधारा टपकायी हैं,

पावस ऋतु सुन्दर आयी है।।

🙏रचना-:

माधुरी नैथानी (स०अ०) 

रा० उ० मा० वि० श्रीकोट गंगानाली 

वि० ख० खिर्सू 

पौड़ी गढ़वाल



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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