हरेला पर्व - डाॅ० आभा भैंसोड़ा
🙏📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के लोक पर्व हरेला के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन डाॅ० आभा भैंसोड़ा जी की रचना:-
🙏📝🌳🌱हरेला पर्व
श्रावण सौर १ प्रविष्टे, कर्क संक्रान्ति,
हरेले की धूमधाम मनायी जाती।
सूर्य नारायण करते प्रस्थान,
मिथुन से कर्क प्रवेश गतिमान।।
आषाढ़ माह में, सावन से पूर्व,
दस दिन पहले, हरेला बोते।
मान्यता हरेला, बोने के दिन से ,
फसल बुआई पूर्णता तब से।।
हरेला बो कर प्रतिष्ठित करते,
मन्दिर में स्थापित कर देते।
दसवें दिन हरेला कटता,
सर्वप्रथम ईश्वर को चढ़ता।।
कामना ईश्वर से करते हैं,
हरेले जैसी हरियाली आये।
माता बहनें, पूजन करती,
घर में सबके खुशहाली लाये।।
घर वालों को आशीष देती,
चिरंजीवी रहो, जागृत रहो।
धनधान्य सब घर में आए,
हरियाली सी खुशियाॅं छाये।।
फूल से सदा मुस्काते रहना,
धरती सा विस्तार रखना।
आकाश सा उच्च शिखर हो,
बुद्धि तुम्हारी अति प्रखर हो।।
🙏 रचना :-
डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०)
रा० प्रा० वि०- देवलचौड़
ब्लाॅक - हल्द्वानी, नैनीताल
🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड


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