पाती वतन के नाम लिखूँ- श्री सोमपाल जी
प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद-नैनीताल से शिक्षक साथी श्री सोमपाल जी की रचना:-
पाती वतन के नाम लिखूँ
पाती वतन के नाम लिखूँ,
मैं गिन–गिन कर इल्जाम लिखूँ।
पाती वतन के नाम लिखूँ।।
गाँधी, नेहरू, पटेल, सुभाष,
अरमान बाबा साहेब का बिका।
अशफाक, भगत और चन्द्रशेखर,
उस बिस्मिल का बलिदान बिका।
मैं उन वीरों का बलिदान लिखूँ,
मै पाती वतन के नाम लिखूँ।।
ऐ भारत मां! तेरे आंँचल पर हैं,
दाग बहुत से लगे हुऐ।
हर घर आँगन चौराहे पर हैं,
नाग बहुत से बसे हुए।
उन विषधरों का विषगान लिखूँ,
मै पाती वतन के नाम लिखूँ।।
दे देकर झूठे आश्वासन,
नेता ठगते लाचारों को।
बेईमान पुलिस दोषी को छोड़,
पकडे़ निर्दोष बेचारों को।
इस दुनिया को बेईमान लिखूँ,
मै पाती वतन के नाम लिखूँ।।
कहने को भाई-भाई पर,
कोई किसी को नहीं भाता।
थोड़े से रुपयों की खातिर,
भाई-भाई को मरवाता।
मै रिश्तों का अपमान लिखूँ,
मै पाती वतन के नाम लिखूँ।।
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई,
कहते हम भाई-भाई हैं।
इनकी हरकत को देख-देख,
भारत माता शरमाई है।
भारत माँ का पैगाम लिखूँ,
मैं पाती वतन के नाम लिखूँ।।
उन बहु-बेटियों की लाज बचे,
क्या ऐसा हम सब सोच रहे?
वो हवस पिपासे सरेआम,
उनकी चमड़ी को नोच रहे।
यहाँ बने हैं सब शैतान लिखूँ,
मैं पाती वतन के नाम लिखूँ।।
यहाँ देखो चाहे वहाँ देखो,
हर जगह लुटेरे लूट रहे।
पहले तो बाहरी लूट गये,
अब अन्दर वाले लूट रहे।
मै लुटा हुआ सम्मान लिखूंँ,
मैं पाती वतन के नाम लिखूँ।।
अब छोटी-छोटी बातों पर,
घर में राड़ मचाई जाती है।
मगर दहेज के लिए दोस्तों,
यहाँ बहू जलाई जाती है।
घर बने यहाँ श्मशान लिखूँ,
मैं पाती वतन के नाम लिखूँ।।
वो सैनिक मरता सीमा पर,
नहीं शहादत दिखती है।
यहाँ शहीदों की गाथा बस,
अखबारों तक बिकती हैं।
सैनिक का नहीं कहीं मान लिखूँ,
मैं पाती वतन के नाम लिखूँ।।
मैं गिन-गिन कर इल्जाम लिखूँ,
पाती वतन के नाम लिखूँ।।
🙏रचना:-
सोमपाल सिंह (स०अ०)
रा० उ० मा० वि० ओखलढ़ुंगा
वि० ख० कोटाबाग, नैनीताल
🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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